भारत24: दिल्ली की हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर चढ़ा वसंत पंचमी रंग, ऐसे शुरू हुई परंपरा
- bharat 24

- Feb 16, 2021
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राजधानी दिल्ली के चर्चित हजरत निजामुद्दीन दरगाह पर भी वसंत का रंग चढ़ गया है। वसंत पंचमी के मौके पर यहां पीले रंग के लिबासों में सजे सूफी कव्वाल सूफी संत अमीर खुसरो के गीत गाते हैं। बताया जाता है कि मौसम और त्योहारों को धर्म से ऊपर उठ कर देखने की यह अनूठी परंपरा यहां कई साल से जारी है। गंगा-जमुनी तहजीब के गवाह रहे अमीर खुसरो के वसंती गीत यहां अभी भी गूंजते हैं।
आपको बता दें कि बहुत से मुसलमान वसंत पंचमी का त्योहार बड़ी धूम-धाम से मनाते हैं। सूफी दरगाहों पर यह जश्न आज भी कई दिनों तक चलता है। मुसलमानों में यह रिवाज तेरहवीं-चौदहवीं शताब्दी में अमीर खुसरो ने दिल्ली में शुरू किया था, जो हजरत निजामुद्दीन के शिष्य थे।
ऐसे शुरू हुई परंपरा
बताया जाता है कि इस शुरुआत के पीछे एक दिलचस्प घटना है। हजरत निजामुद्दीन को अपनी बहन के लड़के सैयद नूह से अपार स्नेह था। नूह बेहद कम उम्र में ही सूफी मत के विद्वान बन गए थे और हजरत अपने बाद उन्हीं को गद्दी सौंपना चाहते थे। लेकिन नूह का जवानी में ही देहांत हो गया। इससे हजरत निजामुद्दीन को बड़ा सदमा लगा और वह बेहद उदास रहने लगे।
अमीर खुसरो अपने गुरु की इस हालत से बड़े दुखी थे और वह उनके मन को हल्का करने की कोशिशों में जुट गए। इसी बीच वसंत ऋतु आ गई। एक दिन खुसरो अपने कुछ सूफी दोस्तों के साथ सैर के लिए निकले। रास्ते में हरे-भरे खेतों में सरसों के पीले फूल ठंडी हवा के चलने से लहलहा रहे थे। उन्होंने देखा कि प्राचीन कलिका देवी के मंदिर के पास हिंदू श्रद्धालु मस्त हो कर गाते- बजाते नाच रहे थे। इस माहौल ने खुसरो का मन मोह लिया। उन्होंने भक्तों से इसकी वजह पूछी तो पता चला कि वह ज्ञान की देवी सरस्वती को खुश करने के लिए उन पर पर सरसों के फूल चढ़ाने जा रहे हैं।









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