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नागालैंड विधान सभा में रचा गया इतिहास , गठन के 58 साल बाद पहली बार गुजा राष्ट्रगान




नागालैंड विधानसभा (Nagaland Assembly) ने इतिहास के पन्नों पर सुनहरे शब्दों में अपना नाम दर्ज करा लिया है. ऐसा इसलिए क्योंकि नागालैंड विधानसभा में पहली बार यानी 58 सालों बाद राष्ट्रगान (National Anthem) के बोल गूंजे. 12 फरवरी को यहां उस समय इतिहास रचा गया जब 13वीं विधानसभा के सातवें सत्र की शुरुआत राष्ट्रगान के साथ हुई.


राष्ट्रगान बजना एक ऐसे राज्य के लिए ऐतिहासिक है, जो दशकों से अलगाववादी हिंसा से त्रस्त रहा है.

1950 तक नगालैंड में अंतर जातीय संघर्ष की वजह से विद्रोह चलता रहा. हिंसा से त्रस्त नगालैंड से विकास शब्द कोसों दूर था. जब देश को आजादी मिली थी तब नगालैंड असम प्रांत का हिस्सा था.

नगालैंड को राज्य का दर्जा 1 दिसंबर 1963 को मिला था. इसी दौरान कोहिमा को राज्य की राजधानी चुना गया था.


नगालैंड में जनवरी 1964 में चुनाव के बाद लोकतांत्रिक रूप से सरकार चुनी गई. इसके बाद इसी साल यानी 1964 के फरवरी महीने में यहां विधानसभा का गठन किया गया. विधानसभा के गठन को 58 साल हो गए हैं और 58 सालों के बाद पहली बार नगालैंड विधानसभा में 12 फरवरी को राष्ट्रगान बजाया गया.


विधानसभा के कमिश्नर और सेक्रटरी पीजे एंटनी ने कहा, ’13वीं विधानसभा के सातवें सत्र के पहले दिन राज्यपाल के अभिभाषण से पहले और बाद में राष्ट्रगान बजाया गया. अधिकतर राज्यों में राष्ट्रगान बजाया जाता है. हालांकि नागालैंड इन राज्यों का हिस्सा नहीं था’.


एंटनी ने कहा, ‘2007 में विधानसभा के नई इमारत में आने के बाद यह पहली बार है जब विधानसभा में राष्ट्रगान बजाया गया है. हालांकि इसकी पहल शरिंगेन लॉन्गकुमेर (Sharingain Longkumer) ने की थी’.


शरिंगेन लॉन्गकुमेर ने कहा, ‘सदन में गवर्नर के अभिभाषण से पहले राष्ट्रगान बजाया जाए. मैंने यह सुझाव दिया और सरकार ने मेरे इस विचार का समर्थन भी किया’. लोंग्कुमेर ने इस बात पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि राष्ट्रगान पहले क्यों नहीं बजाया गया. हालांकि उन्होंने कहा कि यह एक प्रोटोकॉल है’.

 
 
 

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